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सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले नई पीढ़ी के जुड़े पटाखों पर सशर्त छूट दी मंजूरी
भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि सीएसआईआर-नीरी की रिपोर्ट नई पीढ़ी के जुड़े पटाखों में पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम शोर, प्रदूषण और कचरा उत्पन्न होता है। कोर्ट ने त्योहार के मौसम में इन पटाखों पर सशर्त ढील दे दी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने आने वाले त्योहार के सीजन में नई पीढ़ी के जुड़े हुए पटाखों पर सशर्त छूट प्रदान की है। यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक शोध रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
केंद्र सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि सीएसआईआर की राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की जांच में पाया गया है कि नई पीढ़ी के जुड़े पटाखे पारंपरिक पटाखों से कई मायनों में भिन्न हैं। इन पटाखों में खोल और ट्यूब का आकार, विस्फोटक तत्वों का अनुपात, फटने की अवधि और फटने की आवृत्ति में महत्वपूर्ण अंतर है।
नीरी की रिपोर्ट के अनुसार, ये नई पीढ़ी के पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में काफी कम शोर उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा, इन पटाखों से निकलने वाले कणीय प्रदूषण और ठोस कचरे की मात्रा भी उल्लेखनीय रूप से कम है।
यह शोध रिपोर्ट दिल्ली और अन्य शहरों में वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर चल रही कानूनी कार्रवाई के बीच आई है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के साथ त्योहार मनाने की परंपरा को संतुलित करने का यह प्रयास माना जा रहा है।