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UPI लेनदेन पर MDR शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में
भारत में 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क लगाने के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने संशोधित भुगतान कानून, राजपत्र में प्रकाशन न होने और UPI तथा RuPay डेबिट कार्ड में भेदभाव का सवाल उठाया है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका ने UPI लेनदेन पर लगाए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क लगाने का निर्णय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करता है।
याचिका में कहा गया है कि संशोधित भुगतान नीति को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित नहीं किया गया है, जो सरकारी आदेशों के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने इसी सीमा से ऊपर के लेनदेन पर RuPay डेबिट कार्ड को MDR शुल्क से मुक्त रखे जाने का मुद्दा उठाया है।
यह असमानता डिजिटल भुगतान प्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता की मांग करने वाली याचिका का मूल आधार है। माना जाता है कि यह मामला डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को नियंत्रित करने वाले नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
इस याचिका का निर्णय भारत की डिजिटल भुगतान नीति और आर्थिक समावेशन से जुड़े बड़े प्रश्नों का उत्तर दे सकता है। वर्तमान में न्यायालय की ओर से इस मामले पर कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।