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IPS अधिकारियों की तैनाती पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
न्यायाधीश उज्जल भुयां ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारी पूरी तरह दबे हुए हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए कदम उठा रहा है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में तैनाती के मामले पर सरकार से विस्तृत व्याख्या मांगी है। न्यायाधीश उज्जल भुयां की अगुआई वाली पीठ ने कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में सीएपीएफ के कैडर अधिकारी पूरी तरह से प्रतिबंधित और दबे हुए हैं।
न्यायालय की टिप्पणी इस बात को लेकर है कि आईपीएस अधिकारियों को सीएपीएफ में नियुक्त करने की प्रणाली के कारण स्थानीय कैडर के अधिकारियों को कैरियर की प्रगति में बाधा आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
गृह मंत्रालय ने अदालत को सूचित किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों को कार्यान्वित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। मंत्रालय ने कहा है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में कैडर संरचना की समीक्षा की जा रही है ताकि अधिकारियों के विकास के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
यह मामला भारतीय पुलिस सेवा और सीएपीएफ के बीच संरचनात्मक असमानताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के अगले सुनवाई में सरकार को अपनी कार्ययोजना और कार्यान्वयन की समय-सीमा प्रस्तुत करनी होगी।