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भोजन चेतावनी लेबल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्ट समयसीमा
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएआई) के चेतावनी लेबल रोलआउट की स्पष्ट समयसीमा तय करने को कहा है। अदालत ने स्कूलों में पोषण साक्षरता को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी की है।
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शीर्ष अदालत ने बुधवार को यह मुद्दा उठाया कि बच्चे अपने खान-पान के फैसलों में विशेष रूप से कमजोर होते हैं और आवेगप्रवण या अनिर्दित तरीकों से खाना चुनते हैं। इसी संदर्भ में न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि वह एफएसएआई के भोजन चेतावनी लेबल तंत्र को लागू करने के लिए एक निश्चित समय सारणी तैयार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पोषण संबंधी जागरूकता बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। न्यायालय का मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम में पोषण शिक्षा को शामिल करने से युवा पीढ़ी स्वस्थ भोजन विकल्प बेहतर तरीके से समझ सकेगी।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को पिछले कुछ समय से चेतावनी लेबल प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कहा जा रहा है, जो अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों की पहचान करने में मदद करे। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय जनहित याचिका के जरिए आया है जिसमें बाल पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूलों में पोषण साक्षरता को सही तरीके से पढ़ाया जाए, तो बचपन से ही बच्चों में स्वास्थ्यकर आहार की आदतें विकसित हो सकती हैं। इससे न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनस्वास्थ्य में भी सुधार आएगा।