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अंग्रेजी को गैर-मातृभाषा मानना गलत: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को निर्देश दिए
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से त्रिभाषा सूत्र की पुनर्समीक्षा करने के लिए कहा है। अदालत ने अंग्रेजी को गैर-मातृभाषा के रूप में व्यवहार करने और भारतीय भाषाओं के लिए शिक्षकों व पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की मौजूदा त्रिभाषा नीति पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा है कि अंग्रेजी को गैर-मातृभाषा के रूप में वर्गीकृत करना समीचीन नहीं है। अदालत का मानना है कि यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लक्ष्यों के साथ संरेखित नहीं है।
न्यायपीठ ने बोर्ड को अपनी भाषा संबंधी नीति की व्यापक समीक्षा करने का निर्देश दिया है। विशेष रूप से, अदालत ने हिंदी, संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षण के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और उपयुक्त पाठ्यपुस्तकों के अभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है।
अदालत ने माना है कि भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने के लिए केवल नीतिगत परिवर्तन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए बुनियादी ढांचे और संसाधनों में भी व्यापक सुधार आवश्यक है। सीबीएसई से अपेक्षा की गई है कि वह शिक्षकों के प्रशिक्षण, पाठ्यपुस्तक विकास और पाठ्यक्रम डिजाइन में सुधार के लिए एक समय-सीमा के साथ एक कार्य योजना तैयार करे।
यह निर्णय भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।