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दल-बदल के आरोपियों को चुनाव चिह्न देना संवैधानिक अपराध: सुप्रीम कोर्ट
शिव सेना विभाजन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने कहा कि दल-बदल करने वाले राजनेताओं को पार्टी प्रतीक देने का सवाल गंभीर संवैधानिक मुद्दा है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि दल-बदल के आरोपियों को राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न देना संविधान के साथ समझौता करने वाला मामला है। प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जयमल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस प्रश्न पर विचार कर रही है।
शिव सेना के हालिया विभाजन से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह अवलोकन आया। न्यायालय ने माना कि राजनीतिक दलों में अंतर्कलह और विभाजन के मामलों में निर्वाचन आयोग को सावधानीपूर्वक निर्णय लेने होते हैं।
विद्वान न्यायाधीशों ने यह सवाल उठाया कि जो नेता अपने दल के विरुद्ध कार्य करते हैं, उन्हें उसी दल का प्रतीक और नाम कैसे दिया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि दल-बदल एक गंभीर संवैधानिक अपराध माना जाता है।
इस मामले में निर्वाचन आयोग और संबंधित राजनीतिक पक्षों को अपने-अपने पक्ष प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। न्यायालय आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर अपना निर्णय सुनाएगा।