Politics · India Bureau
सर्वोच्च न्यायालय ने मुक्त आवागमन का आदेश दिया, अवैध नज़रबंदी पर प्रतिबंध
सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकों के मुक्त आवागमन का अधिकार सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने मेट्रो पर लगाई गई पाबंदियों और अपने पिछले आदेशों का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच के लिए हलफनामे मांगे हैं।
LSN India ·

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी नागरिक को अवैध रूप से नज़रबंद नहीं किया जा सकता और सभी को स्वतंत्र रूप से आवागमन की अनुमति दी जानी चाहिए। न्यायालय ने यह शर्त लगाई है कि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था के दायरे में ही लागू होगा।
न्यायालय ने मेट्रो सेवाओं पर लगाई गई विभिन्न पाबंदियों की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत हलफनामे प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इसमें यह पता लगाना शामिल है कि क्या इन पाबंदियों ने न्यायालय के पहले के आदेशों का उल्लंघन किया है।
न्यायालय ने 9 अक्टूबर को दिए गए अपने पिछले निर्देशों के संदर्भ में यह कदम उठाया है। अदालत का मानना है कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी प्रशासनिक निकाय संवैधानिक अधिकारों का सम्मान कर रहे हैं।
यह निर्णय नागरिकों की स्वतंत्रता और राज्य की सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। अदालत का यह कदम सुनिश्चित करता है कि किसी भी परिस्थिति में अवैध नज़रबंदी को सहन नहीं किया जाएगा।