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एक राष्ट्र एक चुनाव पैनल की मुख्य न्यायाधीश से मिलने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने एक राष्ट्र एक चुनाव समिति की प्रस्तावित बातचीत को मंजूरी नहीं दी है। कानूनी विशेषज्ञों ने चुनावी सुधारों के संवैधानिक निहितार्थों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक राष्ट्र एक चुनाव पैनल द्वारा मुख्य न्यायाधीश कांत और अन्य न्यायाधीशों के साथ बातचीत की प्रस्तावित योजना को अस्वीकार कर दिया है। यह निर्णय न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संवैधानिक सीमाओं के संरक्षण के संदर्भ में आया है।
इस मुद्दे पर कानूनी समुदाय में व्यापक चिंताएं व्यक्त की गई हैं। विधिवेत्ताओं का मानना है कि प्रस्तावित चुनावी सुधार देश की संवैधानिक व्यवस्था के मूल ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं।
एक राष्ट्र एक चुनाव की अवधारणा केंद्र की ओर से प्रस्तावित की गई थी, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य चुनावों को एक साथ आयोजित करना है। हालांकि, इस प्रस्ताव के विविध पहलुओं पर कानूनी और राजनीतिक वर्गों में गहरे मतभेद हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद पैनल अपनी गतिविधियों को लेकर सावधानीपूर्वक आगे बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि संवैधानिक सुधारों से संबंधित किसी भी कदम को सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए।