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फुटपाथ पर चलने का अधिकार मौलिक अधिकार: सर्वोच्च न्यायालय
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फुटपाथ पर चलने को मौलिक अधिकार घोषित किया है और सरकार से पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग की है। न्यायालय का कहना है कि पैदल चलना देश के स्वतंत्रता संग्राम, राजनीति और सामाजिक सुधारों का आधार रहा है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में पैदल यात्रियों के अधिकारों को सुरक्षित करने का आह्वान किया है। न्यायालय ने कहा है कि फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिसे अब तक संवैधानिक मान्यता नहीं दी गई है।
न्यायालय के अनुसार, पैदल चलना भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रहा है। महात्मा गांधी की नमक यात्रा से लेकर विभिन्न सामाजिक आंदोलनों तक, पैदल यात्रा ने राजनीतिक परिवर्तन और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि यह अधिकार अब तक संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह पैदल यात्रियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक कानून तैयार करे। इस कानून में फुटपाथों के उचित रखरखाव, सुरक्षा मानकों और पैदल यात्रियों के अधिकारों के संरक्षण के प्रावधान होने चाहिए।
यह निर्णय शहरी योजना और नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास है। न्यायालय की टिप्पणी से भारतीय नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित शहरी वातावरण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की उम्मीद है।