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अरावली पैनल को विस्तार से इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर की समय सीमा तय की
सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों की एकसमान परिभाषा तैयार करने वाली उच्च-स्तरीय समिति को अवधि बढ़ाने से मना कर दिया है। न्यायालय ने समिति को खनन विनियमन पर सिफारिशों के साथ 30 नवंबर तक की अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
LSN India ·

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील अरावली पर्वतश्रेणी की सुरक्षा के लिए गठित समिति को समय सीमा बढ़ाने की अनुमति नहीं दी है। न्यायालय ने पैनल के समक्ष स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह 30 नवंबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
यह उच्च-स्तरीय समिति अरावली पहाड़ियों और पर्वतश्रेणी के लिए एक समान परिभाषा विकसित करने का दायित्व संभाल रही है। समिति का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों को विनियमित करने के लिए प्रभावी उपायों की सिफारिश करना है।
अरावली पर्वतश्रेणी दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्रों में से एक मानी जाती है। इस क्षेत्र में अनियंत्रित खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हुआ है, जिससे जल संरक्षण और जैव विविधता संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई दर्शाती है कि न्यायालय अरावली क्षेत्र में तेजी से प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। समिति द्वारा नवंबर के अंत तक प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट इस संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।