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दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट
सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर आंशिक प्रतिबंध का समर्थन किया लेकिन इसे धार्मिक माना जाना सवालों के घेरे में आया। न्यायालय का मानना है कि नागरिकों का सहयोग जिम्मेदारीपूर्ण उत्सव को बढ़ावा देने में अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश के. के. कांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के विरुद्ध अपना रुख स्पष्ट किया है। न्यायाधीश बाघी और न्यायाधीश मोहना के साथ मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा कि ऐसा कठोर कदम आवश्यक नहीं है।
खंडपीठ ने पटाखों पर प्रतिबंध को धार्मिक कारणों से जोड़ने के संबंध में महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्तियों ने पूछा कि पटाखों का विस्फोट आखिरकार धार्मिक मुद्दा कैसे बन जाता है। इससे जुड़े धार्मिक आयामों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
अदालत का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए पूर्ण प्रतिबंध सबसे बेहतर समाधान नहीं है। इसके बजाय, न्यायालय ने नागरिकों की सामाजिक जिम्मेदारी पर बल दिया है।
खंडपीठ का मत है कि जनता से अपील करके पर्यावरण-सचेत उत्सव का संदेश देना अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। नागरिकों का स्वेच्छिक सहयोग और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।