World · India Bureau
इंटरनेट एक्सेस मौलिक अधिकार है, बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट एक्सेस को सभी नागरिकों का संवैधानिक अधिकार माना है। कोर्ट ने बचपन में इंटरनेट के उपयोग पर उम्र आधारित कुल प्रतिबंध लगाने के विचार को खारिज कर दिया है।
LSN India ·

भारत की शीर्ष अदालत ने इंटरनेट तक पहुंच को प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार घोषित करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखने की नीति संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
अदालत के इस फैसले में कहा गया है कि डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट तक पहुंच आधुनिक समय में शिक्षा और सूचना के अधिकार का अभिन्न अंग है। कोर्ट ने माना कि बच्चों के विकास और भविष्य की तैयारी के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी तक की पहुंच आवश्यक है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया है कि इंटरनेट के दुरुपयोग से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अभिभावकों और सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने उचित निगरानी, परिवार द्वारा मार्गदर्शन और संतुलित नीतियों के माध्यम से इंटरनेट के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
यह निर्णय इंटरनेट को एक मौलिक सेवा के रूप में मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि आधुनिक भारत में डिजिटल समावेशन और नागरिकों की सूचना तक पहुंच के अधिकार की रक्षा करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।