Politics · India Bureau
SC/ST आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के अनिवार्य रोटेशन का निर्णय संसद को लेना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह 'गलत नंबर डायल' कर रहे हैं।
LSN India ·

नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के अनिवार्य रोटेशन की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि इन सीटों को समय-समय पर विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बदला जाना चाहिए।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और चुनावी मामलों का निर्णय लेना संसद का अधिकार है, न कि अदालत का। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह मुद्दा सही मंच पर नहीं उठा रहे हैं।
आरक्षण व्यवस्था भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को राजनीतिक प्रक्रिया में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है। इसके तहत कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय संसद की विधायी शक्तियों और न्यायिक सीमाओं को रेखांकित करता है, जिससे स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रणाली में इस तरह के परिवर्तन की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से जनप्रतिनिधियों पर है।