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बाईजूज विवाद में कोर्ट ने CoC की अर्जी पर सुरक्षित फैसला सुरक्षित रखा
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने बाईजूज और GLAS ट्रस्ट के बीच चल रहे विवाद में कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख दिया है। CoC का तर्क है कि पूर्व निदेशक रिजु रविंद्रन की याचिका से उसकी संरचना और कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने बाईजूज और GLAS ट्रस्ट के बीच चल रहे विवाद में कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) द्वारा दायर आवेदन पर अपना निर्णय सुरक्षित रख दिया है। पूर्व बाईजूज निदेशक रिजु रविंद्रन द्वारा दायर की गई याचिका को लेकर CoC ने तर्क दिया है कि वह इस मामले में एक आवश्यक पक्ष है।
CoC का मुख्य तर्क यह है कि रविंद्रन द्वारा मांगी गई राहत सीधे तौर पर CoC की संरचना, उसके कार्यप्रणाली और अतीत में लिए गए निर्णयों को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण से CoC का कहना है कि इस विवाद के निपटारे में उसे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
यह मामला ऋणदाता समितियों के अधिकार और कॉर्पोरेट पुनर्गठन प्रक्रिया में उनकी भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाता है। अदालत का निर्णय इस बात को स्पष्ट करेगा कि इस तरह के विवादों में ऋणदाता समितियों को किस हद तक पक्षकार माना जाए।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुरक्षित रखा गया यह निर्णय आने वाले समय में बाईजूज जैसी संकटग्रस्त कंपनियों से संबंधित अन्य मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।