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आधार कार्ड से उम्र निर्धारण नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की आयु का निर्धारण आधार कार्ड के आधार पर नहीं किया जा सकता। न्यायालय के अनुसार, स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि को ही आयु निर्धारण का वैध आधार माना जाएगा।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है कि आधार कार्ड को किसी व्यक्ति की आयु निर्धारित करने के लिए वैध दस्तावेज नहीं माना जा सकता। न्याय सेवा अधिकारी संजय कारोल और उज्जल भुयां की द्वितीय खंडपीठ ने इस संबंध में अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
कोर्ट की खंडपीठ के अनुसार, मृत व्यक्ति की आयु का सही निर्धारण स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र, अर्थात् स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही किया जाना चाहिए। यह दस्तावेज आयु संबंधी सूचना के लिए अधिक विश्वसनीय और मान्य माना गया है।
यह निर्णय न्यायालय द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों को स्पष्ट करता है कि विभिन्न कानूनी कार्यवाहियों में आयु निर्धारण के लिए किस प्रकार के प्रमाणपत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायिक प्रणाली में आयु संबंधी विवादों को सुलझाने के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड स्थापित करता है।