LSN News › India

Politics · India Bureau

विवाह के लिए दबाव डालने का हथियार नहीं बन सकता आपराधिक मामला: सुप्रीम कोर्ट

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी रिश्ते में दी गई सहमति को पूर्वव्यापी तौर पर जबरदस्ती के जरिए प्राप्त नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों को विवाह के लिए मजबूर करने का साधन नहीं बनाया जा सकता।

LSN India · 6 October 2026

विवाह के लिए दबाव डालने का हथियार नहीं बन सकता आपराधिक मामला: सुप्रीम कोर्ट

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि रिश्तों में सहमति को केवल इसलिए कोई मान्यता नहीं दी जा सकती कि उसे बाद में जबरदस्ती के तहत प्राप्त बताया जाए। न्यायालय का यह फैसला उन मामलों में ऐतिहासिक महत्व रखता है जहां विवाह के दबाव में आपराधिक केसों का उपयोग किया जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में इस बात पर जोर दिया है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को किसी को विवाह के लिए मजबूर करने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। अदालत का मानना है कि ऐसी परिस्थितियां जहां किसी पक्ष को विवाह स्वीकार करने के लिए बाध्य किया जाता है, कानूनी रूप से गैर-मान्य हो सकती हैं।

यह फैसला उन मामलों के संदर्भ में आया है जहां महिलाएं या पुरुष आपराधिक मामलों का सामना करते हुए विवाह के लिए दबाव में आते हैं। न्यायालय का यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहमति के अधिकार की रक्षा करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि कानूनी मामलों में सहमति की प्रामाणिकता पर सवाल उठाने से पहले पूरी परिस्थितियों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अदालत का यह रुख महिला अधिकारों और न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करता है।