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प्रोटीन पाउडर पर कर लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वस्तुओं का वर्गीकरण विक्रय के समय उनके रूप के आधार पर किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि प्रोटीन पाउडर को पेय के रूप में नहीं माना जा सकता क्योंकि उपभोक्ता इसे दूध के साथ मिलाते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने कर प्राधिकारियों को माल और उत्पादों का वर्गीकरण करते समय एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। न्यायालय के अनुसार, किसी भी वस्तु को कर के उद्देश्यों के लिए उसके विक्रय के समय के रूप और स्वरूप के आधार पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए, न कि उस बाद में उपयोग के तरीके के आधार पर।
यह मुद्दा प्रोटीन पाउडर पर लागू होने वाले कर के संबंध में उठा था। प्रोटीन पाउडर के निर्माता और विक्रेता इसे एक पेय के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि उपभोक्ता आमतौर पर इस पाउडर को दूध या अन्य तरल पदार्थों के साथ मिलाते हैं, इसलिए इसे इसकी विक्रय अवस्था में पाउडर के रूप में माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कर प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश प्रदान करता है। न्यायालय का मानना है कि वस्तुओं को उनके सूत्र या संभावित उपयोग के आधार पर नहीं, बल्कि उन्हें बेचे जाने के समय के भौतिक रूप के आधार पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए। इससे कर वर्गीकरण में स्पष्टता और निष्पक्षता आएगी।
यह फैसला खाद्य और पोषण संबंधी उत्पादों पर कर लगाने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। प्रोटीन पाउडर जैसे पूरक आहार बाजार में तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसलिए इन पर लागू होने वाले कर नियमों को स्पष्ट करना आवश्यक था।