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जंतर-मंतर की प्रोटेस्ट साइट स्थिति हटाने पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रसिद्ध जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल की सूची से हटाने के मामले में सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि क्या यह निर्णय केवल न्यायिक टिप्पणियों के आधार पर लिया गया या नीतिगत विचार-विमर्श के बाद।
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सर्वोच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर को सार्वजनिक प्रदर्शन स्थल की सूची से निष्कासित करने के निर्णय पर केंद्रीय सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायपीठ ने अपनी टिप्पणियों में कहा कि यह निर्णय कितना स्वतंत्र और नीतिगत विचार-विमर्श पर आधारित था, इसकी जांच आवश्यक है।
दिल्ली के राजपथ पर स्थित जंतर-मंतर दशकों से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। इस स्थान को सरकार द्वारा औपचारिक रूप से प्रदर्शन के लिए अधिसूचित किया गया था, जिससे नागरिकों को अपनी बात कहने का मंच मिलता था।
न्यायालय की चिंता यह है कि क्या इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेते समय सरकार ने जनता की भागीदारी के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर समुचित विचार किया। कोर्ट ने सरकार को एक निर्धारित समय सीमा में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला भारत में नागरिक अधिकारों और प्रदर्शन की स्वतंत्रता के विषय पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से अधिकार और सार्वजनिक नीति के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा हो सकती है।