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सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई शुल्क पर सरकार से जवाब मांगा, स्थगन से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 2,000 रुपये से अधिक की यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का आधार समझाने को कहा है। अदालत ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई व्यवस्था को रोकने से इनकार कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर नए शुल्क ढांचे को लेकर केंद्र सरकार को विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर शुल्क लगाने का क्या औचित्य है।
अदालत के सामने आने वाली जनहित याचिका में सवाल उठाया गया था कि यह नई नीति आम जनता को वित्तीय लेनदेन से दूर करेगी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की सरकार की घोषित नीति के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि इस नई व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू होने से पहले रोकने की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वह सरकार के जवाब के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
यूपीआई प्लेटफॉर्म पर शुल्क का प्रस्ताव वित्तीय सेवा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। दशकों से शून्य शुल्क पर काम करने वाली इस प्रणाली में यह बदलाव बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा।