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वंदे मातरम को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब
भारतीय राष्ट्रगान को धार्मिक रूप से विभाजनकारी बताते हुए दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं का मत है कि सरकारी आदेश एक विशेष धर्म की देवियों को राष्ट्रीय गान के रूप में थोपते हैं।
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देश के सर्वोच्च न्यायालय ने वंदे मातरम को लेकर दायर याचिकाओं पर सरकार से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी निर्देश एक विशेष धर्म की देवियों को राष्ट्रीय गान के रूप में लोगों पर थोपते हैं, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
अदालत ने इन याचिकाओं में उठाए गए सवालों को संवेदनशील बताया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस तरह के सरकारी आदेश धार्मिक आस्था के मामले में विभाजनकारी साबित हो सकते हैं और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने याचिकाओं में उठाए गए संवैधानिक सवालों की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। अदालत के इस कदम से यह स्पष्ट है कि वह राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक मूल्यों के बीच संतुलन के मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है।
इस मामले की अगली सुनवाई आने वाले सप्ताहों में होने की संभावना है, जब अदालत सरकार के जवाब पर विचार करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस का फैसला भारत में राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक अधिकारों के बीच संबंधों पर महत्वपूर्ण सवाल उठा सकता है।