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सोशल मीडिया से बच्चों की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने मांगे जवाब
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से बच्चों को डिजिटल खतरों से बचाने के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने संबंधी याचिका पर जवाब मांगे हैं।
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न्यायालय द्वारा मांगी गई कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बच्चों की बढ़ती संख्या और उनके सामने आने वाले विभिन्न खतरों को देखते हुए की गई है। याचिका में सुझाव दिए गए हैं कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर आयु सत्यापन को अनिवार्य बनाया जाए ताकि अल्पवयस्क उपयोगकर्ताओं तक नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री न पहुंचे।
याचिका में कहा गया है कि प्लेटफॉर्मों को बच्चों की उम्र के अनुसार सामग्री प्रदान करनी चाहिए और माता-पिता की सत्यापित सहमति लेनी चाहिए। साथ ही, साइबरबुलिंग, यौन शोषण, हानिकारक सामग्री और अत्यधिक प्लेटफॉर्म उपयोग जैसी समस्याओं के विरुद्ध मजबूत सुरक्षा उपाय अपनाए जाने की मांग की गई है।
यह कदम भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। हाल के वर्षों में डिजिटल उपयोग में तेजी से वृद्धि के साथ ही नाबालिगों के समक्ष आने वाले खतरे भी बढ़े हैं। न्यायालय की यह कार्रवाई एक समन्वित राष्ट्रीय नीति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को अब इस विषय पर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करने होंगे ताकि एक व्यावहारिक और प्रभावी नियामक ढांचा तैयार किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।