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बाल अपहरण और तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से मांगा स्पष्टीकरण
देश में बच्चों के अपहरण और तस्करी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कानूनी प्रक्रिया को सख्त करने और इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए प्रभावी उपायों पर सुझाव मांगे हैं।
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बाल अपहरण और तस्करी की घटनाओं में वृद्धि को लेकर चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका के आधार पर सरकारी एजेंसियों से जवाब मांगा है। अदालत का मानना है कि इस समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से बाल अपहरण और तस्करी के मामलों की तेजी से जांच सुनिश्चित करने, विशेष अदालतों की स्थापना करने और पीड़ित बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए व्यापक कदम उठाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान में इस तरह की घटनाओं में देरी से जांच होती है जिससे अपराधी बच निकलते हैं।
अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय और सभी राज्य सरकारों को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सरकारों को बताना होगा कि बाल अपहरण और तस्करी को रोकने के लिए वे क्या कदम उठा रही हैं और कानून को मजबूत करने के लिए क्या प्रस्ताव हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। कोर्ट का कहना है कि हजारों बच्चे हर साल लापता हो जाते हैं और उनमें से कई तस्करी का शिकार बनते हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।