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ट्रांसजेंडर कानून में बदलाव से पहले दिए गए अधिकार नहीं छीने जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट किया है कि ट्रांसजेंडर कानून में संशोधन के बाद भी पहले से जारी किए गए अधिकार और पहचान पत्र निरस्त नहीं किए जा सकते। समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा की गई याचिका में ट्रांसजेंडर आईडी कार्ड रद्द करने से रोकने की मांग की गई है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि ट्रांसजेंडर अधिकार कानून में किए गए किसी भी संशोधन के माध्यम से पहले से प्रदान किए गए अधिकारों को अलग नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कानूनी ढांचे में परिवर्तन होने के बाद भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहले मिले लाभ उनके पास रहने चाहिए।
यह निर्णय तब सामने आया जब ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में सरकारी अधिकारियों को ट्रांसजेंडर पहचान पत्र और संबंधित दस्तावेजों को निरस्त करने से रोकने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधानिक सुरक्षा और समानता के सिद्धांतों पर जोर दिया। न्यायालय का मानना है कि पहचान और अधिकारों से संबंधित मामलों में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस फैसले का महत्व यह है कि यह सरकारी एजेंसियों को किसी भी कानूनी बदलाव के नाम पर पहले से दिए गए अधिकारों को वापस लेने से रोकता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए यह निर्णय उनकी कानूनी सुरक्षा और सामाजिक मान्यता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।