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गांजा मामलों में जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय उदार रुख अपनाता है
सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने कहा है कि अभियुक्त निचली अदालतों से जमानत की याचिका खारिज होने के बाद सीधे शीर्ष न्यायालय का रुख कर सकते हैं। न्यायमूर्तियों ने इस संदर्भ में अपनी उदार नीति का संकेत दिया।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मारिजुआना से संबंधित मामलों में जमानत याचिकाओं पर विचार करते समय एक उदार दृष्टिकोण अपनाने का संकेत दिया है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और पीबी वरले की खंडपीठ ने इस संदर्भ में मौखिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
खंडपीठ के अनुसार, ऐसे मामलों में अभियुक्त जन जब निचली अदालतों से जमानत की याचिका खारिज कर दी जाती है, तब वे सीधे सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। यह निर्देश अभियुक्तों को न्यायिक राहत पाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।
न्यायालय की यह स्थिति तब आई है जब ड्रग्स से संबंधित मामलों में जमानत की प्रक्रिया को लेकर कानूनी स्पष्टता की मांग बढ़ी है। सर्वोच्च न्यायालय के इस कदम से यह संदेश जाता है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में न्यायिक समीक्षा के द्वार बिल्कुल बंद नहीं हैं।
जमानत संबंधी याचिकाओं में सर्वोच्च न्यायालय की उदारवादी नीति अभियुक्तों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह निर्णय न्यायिक पहुंच को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास दर्शाता है।