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दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र पर कड़ा प्रहार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दवाओं की अत्यधिक कीमतों पर तीखी आलोचना की है और पूछा है कि क्या यह 'लूट' को सही ठहराया जा सकता है। अदालत ने दवा उद्योग में मूल्य निर्धारण के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को औषधि क्षेत्र में मूल्य निर्धारण की नीति पर केंद्र सरकार को कठोर निर्देश दिए। न्यायपीठ ने पूछा कि क्या सरकार दवाओं की बढ़ती कीमतों को न्यायसंगत ठहरा सकती है जिससे आम जनता को गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
दवाओं की अत्यधिक कीमतें देश में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में बाधा बन रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर समस्या को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि आम नागरिकों को सस्ती दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने जनहित के मुद्दे पर विचार करते हुए दवा उद्योग और सरकारी नीति निर्माताओं से पारदर्शी और जवाबदेही भरा दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है। न्यायपीठ ने स्पष्ट किया है कि दवाओं की कीमतें जनता की खरीद क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए।