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दिल्ली-एनसीआर में यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान, पुलिस पेट्रोलिंग पर सवाल
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल के यौन उत्पीड़न मामलों पर गंभीर चिंता जताई है और सार्वजनिक स्थलों को 'उच्च जोखिम क्षेत्रों' में बदलने के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते यौन अपराधों के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने कहा है कि पुलिस द्वारा लापरवाही से पेट्रोलिंग और अन्य प्रशासनिक कमियों के कारण सार्वजनिक स्थान असुरक्षित हो गए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्क, सड़कें और अन्य सार्वजनिक स्थलों को 'उच्च जोखिम क्षेत्र' में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्तियों ने कहा कि यह स्थिति नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
न्यायालय ने केंद्रीय और राज्य सरकारों से पेट्रोलिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने, महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ाने और संवेदनशीलता प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक कमियों की जांच के लिए एक समितिको गठित करने के बारे में भी विचार किया है।
अदालत ने जोर दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। न्यायालय आने वाली सुनवाई में इस संबंध में प्राधिकारियों से रिपोर्ट मांगेगा।