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सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल पुरानी सेंट्रल सचिवालय लाइब्रेरी की समस्या का लिया संज्ञान
1891 में स्थापित सेंट्रल सचिवालय लाइब्रेरी को नई सेंट्रल विस्टा परियोजना में स्थान न मिलने की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। ऐतिहासिक महत्व के इस पुस्तकालय के भवन संकट को लेकर अदालत ने कार्रवाई शुरू की है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल सचिवालय लाइब्रेरी की जगह संबंधी समस्या पर स्वतः संज्ञान लेते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह पुस्तकालय 135 साल से भारत के ज्ञान भंडार के रूप में काम कर रहा है और इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देश भर में माना जाता है।
हाल ही में प्रकाश में आई जानकारी के अनुसार, नई सेंट्रल विस्टा विकास परियोजना में इस लाइब्रेरी के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं किया गया है। 1891 में स्थापित इस संस्थान को अपने विशाल संग्रह और बढ़ती मांग को देखते हुए पर्याप्त स्थान की आवश्यकता है। लेकिन राजधानी के इस महत्वपूर्ण पुनर्विकास प्रकल्प में इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी।
लाइब्रेरी की दुर्दशा और इसके संभावित स्थानांतरण को लेकर उठी चिंताओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है। अदालत का यह हस्तक्षेप इस ऐतिहासिक संस्थान की भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई दिल्ली के सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आने वाले समय में अदालत और सरकारी एजेंसियों के बीच इस समस्या के समाधान के लिए विचार-विमर्श होने की संभावना है।