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बार काउंसिल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी दृष्टि से खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को कानून के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। यह फैसला विधि छात्रों के लिए बड़ी जीत है।

LSN India · 3 September 2026

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा दिए गए आदेशों को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण और अधिकार-संहिता के विरुद्ध बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल के पास कानून के अध्ययनरत छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

यह फैसला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश (नालसर) मामले में आया है। इस मामले में बार काउंसिल द्वारा छात्रों के विरुद्ध लिए गए कदमों को लेकर विवाद पैदा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से छात्रों को कानूनी संरक्षण मिला है।

अदालत ने माना कि अनुशासनात्मक कार्रवाई की शक्तियां केवल नियामक निकायों और संस्थानों के पास निहित हैं, न कि पेशेवर निकायों जैसे बार काउंसिल के पास। यह निर्णय विधि शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधि छात्र संगठनों और शिक्षाविदों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट की ओर से सही दिशा का कदम बताया है। इससे भविष्य में छात्रों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होने की उम्मीद है।