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कर्नाटक भर्ती कानून को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज किया, न्यायिक निर्णय को पलटने पर रोक
सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक के 2022 भर्ती कानून को असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायिका न्यायिक निर्णयों के विरुद्ध अपील नहीं कर सकती और उन्हें कानून के माध्यम से पलट नहीं सकती।
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सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कर्नाटक के 2022 भर्ती कानून को खारिज करते हुए कहा है कि विधायिका न्यायालय के फैसलों को पुनः परीक्षण करने का अधिकार नहीं रखती। न्यायपीठ ने माना कि यह कानून संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है। अदालत का यह कदम संवैधानिक सत्ता के विभाजन के सिद्धांत को मजबूत करता है।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही कर्नाटक की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित एक निर्णय दिया था। इसके बाद राज्य विधायिका ने एक नया कानून बनाकर उस निर्णय को निरस्त करने का प्रयास किया। अदालत ने इस कार्रवाई को न्यायिक निर्णयों के विरुद्ध विधायी हस्तक्षेप माना।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विधायिका को अपनी शक्तियों के दायरे में रहते हुए कानून बनाने का अधिकार है, किंतु वह न्यायपालिका द्वारा पारित निर्णयों को पलटने के लिए कानून नहीं बना सकती। यह सिद्धांत संवैधानिक व्यवस्था की नींव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय राज्य और केंद्रीय सरकारों को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि न्यायिक सर्वोच्चता को कमजोर नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से संवैधानिक तंत्र में तीनों सत्ताओं के बीच संतुलन बना रहेगा।