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सर्वोच्च न्यायालय ने संभल हिंसा के आरोपी की NSA कैद को रद्द किया, यूपी को 10 लाख रुपये का जुर्माना
सर्वोच्च न्यायालय ने मुल्ला अफरोज की याचिका पर संभल हिंसा से जुड़े एक आरोपी की नजरबंदी को निरस्त कर दिया है। शीर्ष अदालत ने पाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत की शक्ति का उपयोग 'अवैध' तरीके से किया गया था।
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उत्तर प्रदेश सरकार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई नजरबंदी के आधार पर किए गए एक महत्वपूर्ण फैसले को चिह्नित करता है।
मुल्ला अफरोज की याचिका में अदालत के समक्ष यह सवाल उठाया गया था कि क्या संभल हिंसा की घटनाओं से जुड़ी नजरबंदी को NSA के प्रावधानों के तहत उचित ठहराया जा सकता है। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि नजरबंदी की कार्रवाई कानूनी आधार से रहित थी।
शीर्ष अदालत के इस फैसले से आशंका है कि यह अन्य समान मामलों पर भी असर डाल सकता है जहां NSA का दुरुपयोग किए जाने की आशंका की गई है। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि निवारक हिरासत की शक्तियों का प्रयोग संविधान और कानून के दायरे में ही किया जाना चाहिए।
यह निर्णय सरकारी एजेंसियों के लिए एक सतर्कता का संदेश देता है कि नागरिक स्वतंत्रता के प्रावधानों का सम्मान करते हुए ही कानूनी शक्तियों का प्रयोग किया जाए। अदालत का जुर्माना लगाने का निर्णय अवैध हिरासत के लिए राज्य को जवाबदेही के दायरे में लाने का प्रयास माना जा रहा है।