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चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा देने वाले कानून पर सुप्रीम कोर्ट सवाल
राजद सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों को दीर्घकालीन कानूनी सुरक्षा देने वाले 2023 के कानून के प्रावधान को चुनौती दी है। सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगे गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगे हैं। इस प्रावधान के तहत चुनाव आयुक्तों को अपने पद से हटने के बाद आजीवन सुरक्षा प्राप्त होती है।
राजद के सांसद मनोज झा द्वारा दायर की गई याचिका में इस कानूनी संरक्षण को संविधान के मूल प्रावधानों के विरुद्ध बताया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों को असीमित कानूनी छतरी प्रदान करना जवाबदेही के सिद्धांत के खिलाफ है।
यह मामला संवैधानिक महत्व का है क्योंकि इससे भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठते हैं। अदालत के पास अब सरकार और निर्वाचन आयोग की दलीलों पर विचार करने का दायित्व है।
इस प्रकार के संवैधानिक प्रश्नों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर भारतीय राजनीतिक व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं के कामकाज पर पड़ने वाला है। सरकार से अपेक्षा है कि वह इस कानूनी सुरक्षा के औचित्य को लेकर तर्कपूर्ण जवाब प्रस्तुत करेगी।