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सर्वोच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोप में जांच के अधीन न्यायाधीश को POCSO अदालत से हटाने की याचिका पर विचार करने के लिए सहमति दी
सर्वोच्च न्यायालय ने उस न्यायाधीश को POCSO अदालत से हटाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने के लिए नोटिस जारी किया है, जो बलात्कार के आरोप का सामना कर रहे हैं। उच्च न्यायालय द्वारा पीड़िता की याचिका को खारिज करने के आदेश को चुनौती दी जा रही है।
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सर्वोच्चन्यायालय ने उस न्यायाधीश को यौन अपराधों से संबंधित अदालत से हटाने की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने के लिए सहमति प्रदान की है, जिसके विरुद्ध बलात्कार का आरोप है। पीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया है जो उच्च न्यायालय के एक पूर्व निर्णय को चुनौती दे रही है।
पीड़िता द्वारा दायर की गई मूल याचिका में न्यायाधीश को POCSO (बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम) अदालत की जिम्मेदारियों से रोकने का आग्रह किया गया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने पीड़िता की इस मांग को अस्वीकार कर दिया था।
वर्तमान याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उच्च न्यायालय के इसी आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है। पीठ की ओर से याचिका पर नोटिस जारी किए जाने के साथ-साथ संबंधित पक्षों से उनके विचार प्रस्तुत करने का आह्वान किया गया है।
यह मामला संवेदनशील है क्योंकि इसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता और किसी आरोपी न्यायाधीश की ड्यूटी से छूट की गंभीर प्रश्न जुड़े हैं। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इस याचिका पर विचार करने का निर्णय न्यायिक जवाबदेही और पीड़ितों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।