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UPI पर MDR चार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में वित्त मंत्रालय के हालिया नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसमें 2000 रुपये से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस लेनदेन पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
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सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के आदेश को कानूनी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि 2000 रुपये से अधिक राशि के UPI भुगतान पर 0.4% की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगाने का प्रावधान समस्याग्रस्त है।
अंजन दत्ता द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह निर्णय डिजिटल भुगतान प्रणाली को बाधित करेगा और आम जनता को प्रभावित करेगा। याचिका में सरकार के इस कदम के खिलाफ कई कानूनी तर्क दिए गए हैं।
यह मामला डिजिटल भुगतान की स्वीकृति और उन्हें सुगम बनाने की दिशा में सरकार की नीति को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। UPI प्रणाली को लेकर विभिन्न हितधारकों के बीच पहले भी विवाद देखे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका तब दायर हुई है जब डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की विभिन्न पहल चल रही हैं। इस मामले का निर्णय आने वाले समय में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों की भविष्य की नीति पर प्रभाव डाल सकता है।