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यूपीआई पर व्यापारी शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को 2,000 रुपये से अधिक की यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर सरकार द्वारा लगाए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा। यह कदम छह साल तक मुफ्त यूपीआई सेवा प्रदान करने की परंपरा को तोड़ता है।
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भारत की सर्वोच्च अदालत सोमवार को उस सरकारी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करेगी जिसमें 2,000 रुपये से अधिक की यूपीआई व्यक्ति-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।
केंद्र सरकार ने अक्टूबर 15 से यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर यह नया शुल्क ढांचा लागू किया है। हालांकि, व्यक्तिगत ट्रांसफर और छोटे भुगतान पूरी तरह मुक्त रहेंगे। 75,000 रुपये और इससे अधिक की राशि के लिए शुल्क की सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क रखा गया है। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और स्टॉकब्रोकर्स के माध्यम से भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
व्यक्ति से व्यक्ति को किए जाने वाले ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह सुविधा यूपीआई के कुल लेनदेन की मात्रा का 37 प्रतिशत और मूल्य का 70 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती है।