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विमान यात्रा में विकलांग यात्रियों को भेदभाव: सुप्रीम कोर्ट करेगी जांच
भारतीय विमानन क्षेत्र की तेजी से वृद्धि के बीच विकलांग यात्रियों के लिए सुविधाओं के अभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। बुकिंग से लेकर आगमन तक हर चरण में पहुंच संबंधी बाधाएं आ रही हैं।
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भारतीय विमानन क्षेत्र की तेजी से वृद्धि के दौरान विकलांग यात्रियों के साथ व्यवहार संबंधी गंभीर खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की जांच का आदेश आने वाला है। एक याचिका में आवेदन किया गया है कि देश भर में विमान यात्रा के सभी चरणों में सुलभता सुनिश्चित करने में व्यापक विफलता दिखाई दी है।
याचिका में उजागर किया गया है कि ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया से शुरू करके वेब चेक-इन, एयरपोर्ट प्रवेश, नेविगेशन, काउंटर पर चेक-इन, सुरक्षा जांच, डिजी यात्रा प्रक्रिया, आव्रजन, बोर्डिंग, इन-फ्लाइट सेवाएं और आगमन सहायता तक हर जगह समस्याएं हैं। इन बाधाओं के कारण विकलांग यात्रियों को यात्रा करने में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
यह याचिका देश के विमान परिवहन नेटवर्क के विस्तार के समय विकलांग जनों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करने के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सुलभता सुनिश्चित करना न केवल एक नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि कानूनी दायित्व भी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से विमान परिवहन कंपनियों और हवाई अड्डों को अपनी नीतियों और सुविधाओं की पुनर्समीक्षा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। इससे आने वाले समय में विकलांग यात्रियों के लिए अधिक समावेशी और सुरक्षित यात्रा पर्यावरण बनने की उम्मीद है।