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सुप्रीम कोर्ट ने श्रेणी-III AIF कर मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है जिसमें श्रेणी-III वैकल्पिक निवेश कोषों पर अधिकतम सीमांत दर कराधान का प्रावधान करने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सर्कुलर को चुनौती दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने श्रेणी-III वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के कराधान से संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय के हाल के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है। इस निर्णय से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा जारी किए गए सर्कुलर को लेकर लंबे समय से चली आ रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले इस सर्कुलर को खारिज करते हुए फैसला दिया था कि श्रेणी-III AIFs पर अधिकतम सीमांत दर पर कराधान लागू नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट के अनुसार, मौजूदा कर कानूनों के तहत ऐसे कोषों के लिए विशेष कर व्यवस्था अधिक उपयुक्त थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अर्थ यह है कि दिल्ली हाई कोर्ट का निर्णय अब बरकरार रहेगा। इससे श्रेणी-III AIFs को नई कर राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है। निवेश क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैकल्पिक निवेश कोषों के कराधान को लेकर भारतीय कर नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है।
यह निर्णय भारतीय निवेश बाजार में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को अपनी कर नीति को दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संशोधित करना होगा।