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सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को दर्दनाक तरीके से बदलने की याचिका खारिज की
भारत में फांसी को निष्पादन का तरीका बनाए रखने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में वैज्ञानिक या चिकित्सा साक्ष्य आने पर इस पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी की सजा को कम दर्दनाक तरीके से देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय का यह निर्णय इस बात को स्पष्ट करता है कि फांसी भारत में दंड विधान का एक वैध तरीका बनी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि भविष्य में किसी को वैज्ञानिक, चिकित्सा या अन्य प्रमाण मिलते हैं जो यह साबित करते हैं कि कोई अन्य तरीका कम पीड़ाजनक है, तो इस विषय पर दोबारा विचार किया जा सकता है। अदालत ने यह अवसर भविष्य में संभावित अपीलों के लिए खुला रखा है।
यह फैसला भारत की दंड प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मामले पर आया है। अदालत का रुख यह दर्शाता है कि मौजूदा समय में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर निष्पादन के वर्तमान तरीके को मानवाधिकार की नजर से स्वीकार्य माना जा रहा है।
इस निर्णय से भारत की न्याय व्यवस्था में फांसी की सजा को लेकर चल रही बहस पर प्रकाश पड़ता है। जहां मानवाधिकार कार्यकर्ता अधिक मानवीय तरीके अपनाने की मांग करते रहे हैं, वहीं सरकारी व्यवस्था इसे कानूनी और संवैधानिक माना जाता रहा है।