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तमिलनाडु: जलाशय पर पट्टा रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, 20 फ्लैट मालिकों को वैकल्पिक भूमि
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में जलाशय पर बनी आवासीय परियोजना का पट्टा रद्द करने के निर्णय को बरकरार रखा है। कोर्ट ने 20 फ्लैट मालिकों को छह महीने में वैकल्पिक जमीन आवंटित करने का आदेश दिया है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायपीठ ने तमिलनाडु सरकार को एक जलाशय पर दी गई पट्टा मंजूरी को निरस्त करने के निर्णय को बहाल रखा है। न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजरिया की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि वह 20 फ्लैट मालिकों को छह महीने की समय सीमा के भीतर एक उपयुक्त साइट आवंटित करे।
न्यायालय के अनुसार, इस वैकल्पिक भूमि का आवंटन केवल इसके बाद ही किया जाएगा जब तक कि निर्माणाधीन अपार्टमेंटों को ध्वस्त न किया जाए। यह निर्णय जल संरक्षण और पर्यावरणीय हितों की रक्षा के सिद्धांत पर आधारित है जो जलाशयों के आसपास के क्षेत्रों में निर्माण को प्रतिबंधित करते हैं।
यह मामला दशकों से लंबित था और पर्यावरण संरक्षण बनाम संपत्ति अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से तमिलनाडु में जलाशय संरक्षण की नीति को कानूनी समर्थन मिला है।