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विवाह को दूसरा मौका दें: गर्भपात याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने एक विच्छिन्न दंपति को छह महीने पुराने विवाह को दूसरा मौका देने के लिए कहा है। अदालत ने पत्नी की 25 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की याचिका पर सुनवाई से पहले दोनों को सुलह के लिए प्रोत्साहित किया है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एक दंपति को अपने विवाह संबंध पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। छह महीने के विवाहित जीवन में तनाव का सामना कर रहे इस युगल को अदालत ने सलाह दी है कि वे एक-दूसरे से मिलकर बात करें और समस्याओं का समाधान खोजें।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विवाहिता की गर्भपात की याचिका पर निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को सुलह-समझौते का प्रयास करना चाहिए। अदालत की चिंता यह है कि विवाहिक कलह के बीच लिया गया कोई भी अपरिवर्तनीय निर्णय भविष्य में दोनों के लिए आजीवन पछतावे का कारण बन सकता है।
अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि यदि दंपति बाद में आपस में मेल-जोल कर लें और उनके संबंध सामान्य हो जाएं, तो ऐसे में गर्भपात जैसा अंतिम निर्णय दोनों पक्षों के मन में गहरा दर्द छोड़ सकता है। इसी कारण से अदालत ने विवाह को बचाने के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है।
यह मामला विवाहिता की 25 सप्ताह की गर्भावस्था से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि न्यायालय न केवल कानूनी पहलुओं पर विचार करता है, बल्कि विवाहित जीवन और पारिवारिक संबंधों की भावनात्मक जटिलताओं को भी समझता है।