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सर्वोच्च न्यायालय ने तीन उच्च न्यायालयों के आदेशों की भाषा पर उठाए सवाल
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को यौन अपराधों के मामलों में असंवेदनशील भाषा के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की। पिछले महीने पटना उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद अब तीन उच्च न्यायालयों के समान मामले सामने आए हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को देश के न्यायाधीशों के लिए यौन अपराधों के मामलों में संवेदनशील भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत के समक्ष तीन उच्च न्यायालयों के आदेशों में असंवेदनशील भाषा के उदाहरण सामने आए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने पटना उच्च न्यायालय के एक विवादास्पद फैसले के बाद स्वतः संज्ञान लिया था। उस फैसले में कहा गया था कि किसी महिला की छाती दबाना और सलवार उतारना 'बलात्कार का प्रयास' नहीं माना जाएगा। इस फैसले पर आपत्ति के बाद सर्वोच्च न्यायालय को देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से इसी तरह की और भी घटनाएं सामने आईं।
अदालत का मानना है कि न्यायिक आदेशों में अपनाई जाने वाली भाषा यौन अपराधों के मामलों में विशेष संवेदनशीलता के साथ चुनी जानी चाहिए। न्यायाधीशों को ऐसे मामलों की संवेदनशीलता को समझते हुए अपने निर्णयों में सावधानीपूर्वक शब्दों का चयन करना चाहिए।
यह कदम न्यायपालिका में संवेदनशीलता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया में भाषा की भूमिका न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।