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सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शन से व्यापारियों को नुकसान पर संवैधानिक टॉर्ट की चेतावनी दी
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से प्रभावित व्यापारियों और दैनिक मजदूरों को मुआवजे की चेतावनी दी है। न्यायालय ने कहा कि पर्व के मौसम में होने वाली आर्थिक क्षति के लिए मुआवजे का प्रावधान हो सकता है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को स्पष्ट संकेत दिया है कि दिल्ली में चलने वाले प्रदर्शनों से प्रभावित व्यापारियों, दुकानदारों और दैनिक मजदूरों को राहत मिल सकती है। न्यायालय के अनुसार, सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन से नागरिकों को हुई क्षति के लिए संवैधानिक आधार पर मुआवजे का मामला उठाया जा सकता है।
न्यायालय ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिलाया कि त्योहारी मौसम में आयोजित प्रदर्शनों से छोटे व्यापारियों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। दिवाली और अन्य प्रमुख त्योहारों के समय दुकानें बंद रहने से न केवल व्यापारियों को सीधा नुकसान हुआ है, बल्कि उन पर आश्रित असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की भी आय प्रभावित हुई है।
न्यायालय ने संकेत दिया है कि यदि प्रदर्शन से किसी नागरिक को असाधारण क्षति हुई है, तो उसे संवैधानिक टॉर्ट के अंतर्गत मुआवजे की मांग करने का अधिकार हो सकता है। इस संदर्भ में, संबंधित प्राधिकारियों को प्रभावित व्यक्तियों के दावों पर विचार करना होगा।
यह फैसला शहर में चल रहे विभिन्न सार्वजनिक आंदोलनों और उनके सामाजिक-आर्थिक परिणामों पर न्यायिक निगरानी का हिस्सा है। न्यायालय का यह दृष्टिकोण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।