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सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध बालू खनन की जांच का विस्तार किया
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एक बार नष्ट हुई नदियों की भरपाई नहीं की जा सकती। चंबल नदी में अवैध बालू खनन के समाचार प्रतिवेदनों के आधार पर शुरू की गई जांच को विस्तृत किया जा रहा है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध बालू खनन की समस्या को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक बार नष्ट हुई नदियों की क्षति की भरपाई संभव नहीं है। यह टिप्पणी न्यायालय द्वारा चंबल नदी में अवैध बालू खनन की गतिविधियों की जांच करने के लिए स्वप्रेरणा से शुरू की गई कार्रवाई के दौरान की गई है।
न्यायालय ने समाचार माध्यमों की रिपोर्टों के आधार पर इस मामले को संज्ञान में लिया था। चंबल नदी में होने वाली अवैध बालू खनन की गतिविधियां पर्यावरण और जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।
इस जांच के विस्तार के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय नदी संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त कर रहा है। न्यायालय का मत है कि पर्यावरणीय क्षति को केवल वित्तीय मुआवजे से नहीं सुधारा जा सकता।
अवैध खनन से नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलीय जीवन और आसपास के इलाकों के भूजल स्तर को गंभीर नुकसान होता है। इस मामले की आगे की कार्रवाई सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।