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सर्जिकल स्ट्राइक: जनरल निंभोरकर ने खोले रहस्य, 18 लोगों को ही थी जानकारी
उरी हमले के बाद सितंबर 2016 में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले ऑपरेशन के दौरान 16 कॉर्प्स के कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामराव निंभोरकर ने इस ऐतिहासिक घटना के पर्दे के पीछे की कहानी साझा की है।
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उरी में सेना के शिविर पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने 28 सितंबर 2016 की रात को सर्जिकल स्ट्राइक अभियान को अंजाम दिया। इस संवेदनशील सैन्य कार्रवाई के दौरान नगरोटा स्थित 16 कॉर्प्स (व्हाइट नाइट कॉर्प्स) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामराव निंभोरकर की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर उन मात्र 18 लोगों में से एक थे जिन्हें इस गोपनीय ऑपरेशन की पूर्व जानकारी थी। इस ऑपरेशन की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए सूचना के प्रसार को सीमित रखा गया था ताकि किसी भी तरह की खुफिया या सुरक्षा संबंधी खतरे से बचा जा सके।
यह सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ था। इस कार्रवाई के माध्यम से भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया और पाकिस्तान के क्षेत्र में आतंकवादी संचालन केंद्रों को निशाना बनाया।
निंभोरकर के कथन से इस सैन्य अभियान की योजना और क्रियान्वयन से जुड़ी जटिलताओं का अंदाजा मिलता है। उन्होंने बताया कि हालांकि योजना तो तैयार कर दी गई थी, लेकिन इसके अनुमोदन को लेकर अनिश्चितता बनी रही थी।