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टिकाऊ विमानन ईंधन परंपरागत जेट ईंधन से 2-3 गुना महंगा हो सकता है
सरकार की मसौदा नीति के अनुसार, टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ) परंपरागत जेट ईंधन की तुलना में काफी अधिक महंगा पड़ सकता है। हालांकि, यह ईंधन विमान परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में प्रभावी साबित हो सकता है।
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टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ) एक वैकल्पिक ईंधन विकल्प है जो पेट्रोलियम आधारित नहीं होता। यह गैर-पेट्रोलियम स्रोतों से तैयार किया जाता है और विमान परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम करता है।
भारत सरकार द्वारा तैयार की जा रही इस नीति में यह संकेत दिया गया है कि एसएएफ का उपयोग करने की कीमत पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में दो से तीन गुना अधिक हो सकती है। इस महंगाई के कारण भारतीय विमानन उद्योग के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देशों में अक्षय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, टिकाऊ विमानन ईंधन की उच्च लागत इसके व्यापक अपनाए जाने में बाधा बन सकती है।
सरकार इस मसौदा नीति के माध्यम से विमान संचालकों को एसएएफ के उपयोग में प्रोत्साहित करने और इसकी लागत को क्रमिक रूप से कम करने के लिए विभिन्न उपाय विचार कर रही है। आने वाले समय में इस प्रौद्योगिकी में सुधार और पैमाने पर उत्पादन से कीमतों में कमी आने की संभावना है।