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निरंतर संवाद से निवेश और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी: पुरी
भारत और ओपेक के बीच द्विपक्षीय सहयोग ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद जरूरी है। वर्ष 2015 से शुरू हुई इस संवाद प्रक्रिया से ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा और विदेशी निवेश दोनों बढ़ सकते हैं।
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भारत-ओपेक संवाद को मजबूत करने के लिए दोनों पक्षों के बीच निरंतर संवाद सबसे महत्वपूर्ण है। इस संवाद प्रक्रिया के जरिये देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है और विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है।
भारत और ओपेक के बीच औपचारिक द्विपक्षीय सहयोग ढांचा वर्ष 2015 में स्थापित किया गया था। तब से यह संवाद प्रक्रिया दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ और सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती मांग को देखते हुए ओपेक देशों से निरंतर और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है। संवाद के माध्यम से तेल आपूर्ति को लेकर दीर्घकालीन समझौतों पर भी चर्चा की जा सकती है।
यह सहयोग ढांचा भारत की ऊर्जा नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संवाद को और गहरा करने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिल सकती है और निवेश के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।