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स्विस वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर पिघलने से बचाने के लिए भेड़ के ऊन का उपयोग किया
स्विस शोधकर्ताओं ने ग्लेशियर के पिघलने को रोकने के लिए एक नवीन प्रयोग किया है। 200 वर्गमीटर क्षेत्र को भेड़ के ऊन से ढंककर प्रारंभिक परीक्षण में उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।
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स्विस वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर संरक्षण के लिए एक अभिनव तरीका अपनाया है। उन्होंने प्राकृतिक भेड़ के ऊन से बने कंबलों का उपयोग करके ग्लेशियर के 200 वर्गमीटर क्षेत्र को ढक दिया है। यह पर्यावरण के अनुकूल समाधान कृषि के अपशिष्ट पदार्थ के रूप में उपलब्ध भेड़ के ऊन का उपयोग करता है।
प्रारंभिक परीक्षणों में इस पद्धति के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्राकृतिक ऊन कंबल कृत्रिम विकल्पों के समान प्रभावकारिता प्रदर्शित करते हैं। यह दृष्टिकोण स्थानीय स्तर पर ग्लेशियर के संरक्षण में मदद कर सकता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक अकेले वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। ग्लेशियरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना आवश्यक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यापक और समन्वित प्रयास अपरिहार्य हैं।