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गैस स्टोव को इलेक्ट्रिक में बदलने से दमा के लक्षणों में कमी

नए अध्ययन में पाया गया है कि गैस चूल्हों से निकलने वाली नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषक दमा को बढ़ाते हैं। घरों में विद्युत चूल्हों का इस्तेमाल करने से श्वसन स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

LSN India · 4 September 2026

गैस स्टोव को इलेक्ट्रिक विकल्प से बदलने से दमा के रोगियों के लक्षणों में महत्वपूर्ण कमी आ सकती है। ताजा शोध से पता चलता है कि घरेलू रसोई में उपयोग किए जाने वाले गैस चूल्हे हानिकारक प्रदूषकों का प्रमुख स्रोत हैं।

इस अध्ययन के निष्कर्षों में गैस स्टोव से निकलने वाली नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अन्य रासायनिक प्रदूषकों की भूमिका रेखांकित की गई है। ये प्रदूषक वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं और श्वसन संबंधी समस्याओं को गंभीर बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार घर के अंदर की खराब वायु गुणवत्ता दमा के रोगियों के लिए विशेष चिंता का विषय है।

इलेक्ट्रिक स्टोव अपनाने से घरों में प्रदूषकों की मात्रा कम होती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई, खांसी और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं में कमी देखी जा सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह सरल परिवर्तन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां घर के अंदर वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है।

भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों में घरेलू वायु प्रदूषण का मुद्दा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय रहा है। यह अध्ययन खाना पकाने की प्रणाली में बदलाव के माध्यम से स्वास्थ्य सुधार के संभावित तरीकों को चिह्नित करता है।