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फिल्म 'डोरोथी' के LGBTQ+ चित्रण पर विवाद, सोशल मीडिया पर बहिष्कार की मांग
कार्तिक सुब्बराज की फिल्म 'डोरोथी' के LGBTQ+ समुदाय के चित्रण को लेकर सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। दर्शक और कार्यकर्ता फिल्म के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं।
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तमिलनाडु की ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म 'डोरोथी' को LGBTQ+ समुदाय के प्रतिनिधित्व के तरीके को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। फिल्म 1990 के दशक की शुरुआत में दो बचपन के दोस्तों की कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके जीवन में जातिगत विभाजन, हिंसा और कठोर सामाजिक विचार केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
इस फिल्म को लेकर उठे सवालों के मूल में यह है कि LGBTQ+ पात्रों को किस तरह से दिखाया गया है। समुदाय के सदस्य और उनके समर्थक मानते हैं कि फिल्म में समस्याग्रस्त रूढ़िवादी चित्रण दिए गए हैं। X (पूर्व में ट्विटर) पर कई उपयोगकर्ताओं ने फिल्म के बहिष्कार का आह्वान किया है।
यह विवाद दक्षिण भारतीय सिनेमा में LGBTQ+ समुदाय के चित्रण को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता को रेखांकित करता है। पिछले वर्षों में तमिल फिल्मों में समान मुद्दों पर बहस देखने को मिली है, जहां निर्माताओं से अधिक संवेदनशील और समावेशी प्रतिनिधित्व की मांग की गई है।
फिल्म निर्माता अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं करेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस आलोचना से फिल्म की बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर क्या असर पड़ता है।