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तमिलनाडु विधानसभा ने पिछड़ी जातियों की गणना में 'खुली सूची पद्धति' खत्म करने की मांग की
तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें केंद्र से पिछड़ी जातियों की जनगणना में 'खुली सूची पद्धति' को समाप्त करने का आग्रह किया गया है। इस पद्धति में लोग स्वयं अपनी जाति घोषित कर सकते हैं, जिससे डेटा संग्रहण में अस्पष्टता उत्पन्न होती है।
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तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार से अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी), अति पिछड़ी जातियों (एमबीसी) और अन्य वर्गों की जनगणना में प्रयुक्त 'खुली सूची पद्धति' को समाप्त करने का आह्वान किया है।
वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही 'खुली सूची पद्धति' में जनगणना के दौरान लोग स्वयं अपनी जाति घोषित करते हैं और जनगणनाकर्ता उसे रिकॉर्ड करते हैं। इसके बजाय एक पूर्व-निर्धारित सूची से चयन करने की सुविधा नहीं होती है, जिससे डेटा संग्रहण में अस्पष्टता और विसंगतियां उत्पन्न होती हैं।
विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित यह प्रस्ताव जनगणना प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य के अधिकारियों का मानना है कि मानकीकृत सूची का उपयोग करने से जाति आधारित आंकड़ों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।
यह प्रस्ताव सामाजिक न्याय और जनगणना डेटा की गुणवत्ता को लेकर उठाई गई चिंताओं का प्रतिबिंब है। तमिलनाडु ने केंद्र सरकार से इस पद्धति में सुधार के लिए शीघ्र कार्रवाई करने की अपेक्षा की है।