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तमिलनाडु उपचुनावों को रोकने के निर्णय को चुनौती दे रहे हैं विजय के वकील
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी के वकील ने पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव न कराने के चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दी है। वरिष्ठ वकील जी. मसीलामणि ने तमिलनाडु हाईकोर्ट में तर्क दिया कि यह निर्णय असंवैधानिक है।
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मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायाधीश जी. अरुल मुरुगन की पीठ के समक्ष पेश होते हुए, वरिष्ठ वकील जी. मसीलामणि ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के इस निर्णय को गंभीर प्रश्नों के घेरे में खड़ा किया कि तिरुचिरापल्ली पूर्व, पेरुंदुराई, अम्बासमुद्रम, विरलिमलै और करूर विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव क्यों नहीं कराए जाएंगे।
अदालत में प्रस्तुत अपने तर्कों में मसीलामणि ने रेखांकित किया कि चुनाव आयोग के इस रुख से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन सीटों पर लंबे समय तक प्रतिनिधित्व के बिना रहने से जनता के अधिकारों का हनन होता है। उप-चुनाव कराने के संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
चुनाव आयोग द्वारा ये सीटें वर्तमान में विधानसभा भंग की प्रक्रिया में हैं, इसी कारण इन्होंने उपचुनाव स्थगित करने का निर्णय दिया था। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि भंग होने तक की स्थिति में भी चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता था।
हाईकोर्ट में यह मामला तकनीकी और संवैधानिक महत्व को लेकर गंभीरता से सुने जा रहे हैं। अदालत आने वाले समय में अपना निर्णय सुनाएगी, जो तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।